हेल्लो नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी का मेरे आज के इस ब्लॉग पोस्ट मे और दोस्तो आज के इस पोस्ट मे मैं आपको बताऊँगा की डिप्रेशन के अवस्था मे जाने के बाद किसी समान्य व्यक्ति मे क्या क्या बदलाव आ जाते है? आखिर कैसे आप खुद के अंदर मौजूद डिप्रेशन को पहचान सकते हो |

लेकिन आगे कुछ भी बताने से पहले मैं आपको ये बताना चाहता हूँ की इनमें से कोई भी लक्षण आपके अंदर अगर एक या दो दिनों के लिए है तो आपको चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है ये बहुत समान्य सी बात हैं , लेकिन हाँ अगर ये सारे लक्षण आपमें 14 या उससे अधिक दिनों के लिए मौजूद है तो मनोविज्ञान के भाषा मे आप वाकई तनाव की स्थिति मे हैं ||
1. एकाग्रता का कम होना – एकाग्रता हमारे दिमाग के उस स्थिति को कहा जाता हैं जिसमे हमारा दिमाग बिना बिचलित हुए एक काम पर ध्यान दे पता है, मतलब अगर कोई इंसान जितना ज्यादा वक़्त तक किसी काम पर ध्यान कर पा रहा है बिना बिचलित हुए उसकी एकाग्रता उतनी अच्छी होगी || है न तो तनाव की वजह से सबसे पहले हमारी एकाग्रता पर असर परता है और इसके पीछे की वजह ये है की जब हम किसी विचार को लेकर तनाव मे होते है तो लगतार उसी विचार के बारे मे सोचते रहते है || तो बहुत स्वभाविक सी बात है की इससे हमारे एकाग्रता पर असर पड़ेगा || है न
लेकिन ये पहली चीज आपके लिए काम भी है क्योंकि अगर आपको कोई विचार प्रभावित कर रही है जिससे आप परेशान हो मतलब वही विचार आपके तनाव की असली वजह हैं||
2. याददास्त का कमजोर होना – अब जब कोई व्यक्ति किसी कार्य के प्रति एकाग्र नहीं हो पायेगा तो कहाँ से वो चीजो को अच्छे ढँग से याद रख पायेगा है न || क्योंकि अगर आप ठीक ढँग से देखे तो याददास्त और एकाग्रता कहीं न कहीं आपस मे जुड़े हुए है || है न देखिये हम इंसानो के लिए वाकई मे सारी चीजों को याद रख पाना संभव नहीं है लेकिन जब हमारा दिमाग बहुत साधारण चीजो को भी भूलने लग जाती है तब तो वाकई मे ये चिंता का विषय है ||
3. निराशावादी मानसिकता – अब देखिये वैसे तो हर इंसान अपने जीवन के किसी न किसी छेत्र मे कभी कभी निराशावादी हो जाता है लेकिन जो लोग तनाव की स्थिति मे होते है वो अपने समान्य जीवन के लगभग सभी पहलू मे निराशावादी हो जाते है जो बिल्कुल भी सही नहीं है| उन्हें येसा लगने लगता है की कोई भी इंसान या कोई भी चीज उनके लिए सकारात्मक रूप से काम नहीं कर पायेगी ||
4. Anergia – एनिर्जिया हमारी उस स्थिति को कहा जाता है जिसमे हम बहुत कम ऊर्जावान महसूस करते हैं || येसा आमतौर पर हमारे जिंदगी मे वैसे भी होता है लेकिन जब ऐसी स्थिति लम्बे समय तक रहे और साथ मे आप ऊपर के लक्षणों से भी ग्रस्त हो तो समझ लीजिये की आप तनाव के शिकार है या अगर किसी दूसरे मे ये लक्षण मौजूद हैं मतलब वो तनाव की स्थिति मे है || है न
Anhedonia – ये हमारे दिमाग की वो स्थिति है जिसमे हम अपने पसंदीदा चीजों से भी दूरी बना लग जाते है | जैसे अगर किसी को फिल्मे देखना पसंद है तो वो अपने तनाव के विचारों मे इतना खो जाता है की वो बाकी की सारी चीजों से दूरी बनाने लग जाता हैं ||
तो दोस्तों ये थी डिप्रेशन की वो लक्षण जिससे आप बहुत आसानी से अपने तनाव को पहचान सकते हो और समस्या पता चलने के बाद समाधान तो आ ही जाता है ||
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